Donald Trump Iran Statement | ईरान को बिना शर्त सरेंडर करना होगा: ट्रंप का बड़ा बयान
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Donald Trump Iran Statement
ट्रंप बोले- ईरान बिना शर्त सरेंडर करे, तभी कोई डील संभव.
अमेरिका-इजरायल हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई से बढ़ा तनाव.
युद्ध का असर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ा.
America / अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच एक कड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी तरह की बातचीत या समझौता तभी संभव है जब वह बिना शर्त सरेंडर करे। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के साथ बिना शर्त आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका एक ऐसे नेतृत्व का चुनाव करेगा जो ईरान को मौजूदा संकट से बाहर निकाल सके और देश को फिर से स्थिर और मजबूत बना सके।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और बेहतर बनाने के लिए काम करेगा, लेकिन इसके लिए पहले वहां की मौजूदा स्थिति में बड़ा बदलाव जरूरी है। उन्होंने ईरान के भविष्य को “शानदार” बताते हुए कहा कि अमेरिका ईरान को बर्बादी के कगार से वापस लाने के लिए बिना थके काम करेगा। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में भी अमेरिका की भूमिका की बात कही, जिससे यह साफ है कि अमेरिका इस पूरे संकट में केवल सैन्य ही नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी हस्तक्षेप करना चाहता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान की ओर से शांति की बात कही जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कुछ देशों की ओर से मध्यस्थता के प्रयास शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति चाहता है, लेकिन अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी राष्ट्रपति के इस बयान के तुरंत बाद ट्रंप की ओर से आया “बिना शर्त सरेंडर” वाला बयान इस संघर्ष को और गंभीर बना देता है।
दरअसल, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद यह संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की एक बड़े हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी एशिया में कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों का असर पूरे क्षेत्र में देखा गया और कई देशों की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई।
इस दौरान एक बड़ी सैन्य घटना हिंद महासागर में भी हुई, जहां अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी युद्धपोत पर हमला कर उसे डुबो दिया। इस हमले में लगभग 80 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई। इसके अलावा ईरान ने अजरबैजान की ओर भी मिसाइल दागी, जिससे वहां भी तनाव बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में हिजबुल्ला के ठिकानों पर लगातार हवाई हमले तेज कर दिए हैं।
इस पूरे संघर्ष का असर अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रह गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस युद्ध से पश्चिमी एशिया समेत कम से कम 14 देश किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है और आम नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मृतकों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 120 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजरायल में भी करीब एक दर्जन लोगों की जान गई है। इसके अलावा इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हो चुकी है।
इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिमी एशिया तेल और गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र है और यहां जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता सताने लगी है।
कुल मिलाकर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट का रूप लेता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयासों से हालात को शांत किया जा सकेगा या फिर यह टकराव और ज्यादा गहराता जाएगा।